आइए समझें भूमि अधिग्रहण कानून और इसमे किए गये बदलाव

आइए समझें भूमि अधिग्रहण कानून और इसमे किए गये बदलाव

साल 2013 से पहले तक देश में जमीन अधिग्रहण 1894 में बने कानून के तहत होता था। यूपीए सरकार ने इस कानून में सुधार किया और कुछ अहम संशोधनों को इसमें शामिल किया। 1894 के भूमि अधिग्रहण कानून में मुआवजे के प्रावधान अत्यधिक अपर्याप्त थे और ‘यह आवश्यक हो गया था कि और अधिक मुआवजे के साथ साथ पुनर्वास एवं पुनस्र्थापन पैकेज के भी प्रावधान किए जाएं। 2013 के कानून में ऐसा किया गया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार ने ग्रामीण विकास और किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए वर्तमान भूमि अधिग्रहण कानून में कुछ और महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं। लेकिन कुछ राजनीतिक दल और संगठन राजनीतिक कारणों से इसका विरोध कर रहे हैं।

भूमि अधिग्रहण कानून में अध्यादेश लाकर किए गए बदलावों के विरोध में समाजसेवी अन्ना हजारे ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर दो दिनों का प्रदर्शन शुरू कर दिया। धरने पर बैठे अन्ना ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, ‘पीएम मोदी ने अच्छे दिनों का वादा किया था, इसलिए लोगों ने उन्हें वोट दिया। हालांकि, ऐसा हुआ नहीं। अच्छे दिन सिर्फ पूंजीपतियों के आए हैं।’

अन्ना (और सभी विरोधी दल ) के भाषण के प्रमुख बिंदु:

  • भूमि अधिग्रहण बिल अलोकतांत्रिक और किसान विरोधी है।
  • उद्योगपतियों को फायदा पहुंचाने के लिए सरकार किसानों से धोखा कैसे कर सकती है?
  • सरकार उसी तरह जमीन लेने की तैयारी में है, जैसे अंग्रेज करते थे।
  • अध्यादेश लाने की जरूरत क्या है, जब एक्ट 2013 में पास हो चुका है।
  • बहुत कम ही किसानों को बिल की जानकारी है, जागरूकता फैलानी होगी।

कांग्रेस पार्टी के साथ-साथ बहुतेरे विपक्षी दल भी इस क़ानून पर सरकार को घेरने मे लगी है और इसे किसान-विरोधी बता रही हैI ऐसे मे यह ज़रूरी हो गया है की हम इन सांसोधनों को अच्छी तरह से समझें.

मूलभूत बदलाव और इसके परिणाम: 

सहमति: रक्षा, सस्ते घर और औद्योगिक कॉरिडोर के लिए प्रभावित होने वाले 80 प्रतिशत लोगों की सहमति ज़रूरी थी। बहुफसली जमीन का बिना सहमति के अधिग्रहण नहीं किया जा सकता था। सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन का सर्वे अनिवार्य था। यूपीए सरकार ने जो भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास और पुन:स्थापन अधिनियम, 2013 बनाया था, उसमें 13 कानूनों को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखा गया था। इनमें सबसे प्रमुख तो कोयला क्षेत्र अधिग्रहण और विकास कानून 1957 और भूमि अधिग्रहण (खदान) कानून 1885, और राष्ट्रीय राजमार्ग अधिनियम, 1956 है। इसके अलावा इटॉमिक ऊर्जा कानून 1962, इंडियन ट्रामवेज एक्ट 1886, रेलवे एक्ट 1989 जैसे कानून प्रमुख हैं।

बदलाव: नरेंद्र मोदी सरकार ने इसमें कुछ और महत्वपूर्ण विषयों के लिए भूमि अधिग्रहण को सोशल इंपैक्ट और कंसेंट क्लाज से बाहर रखे गए कानूनों की सूची में जोडा है। बहुफसली जमीन (धारा 10A) के तहत पांच उद्देश्यों राष्ट्रीय सुरक्षा, रक्षा, ग्रामीण आधारभूत संरचना, औद्योगिक कॉरिडोर और पीपीपी समेत सार्वजनिक आधारभूत संरचनाएं के लिए बिना सहमति के अधिग्रहित की जा सकती है। इन पांचों क्षेत्रों को सोशल इम्पैक्ट असेसमेंट (आसपास के इलाके में सामाजिक प्रभाव, अनिवार्य) सर्वे से भी मुक्त किया गया। सरकार इस बात पर सहमत है कि सबसे पहले सरकारी जमीन का, फिर बंजर भूमि, फिर आखिर में अनिवार्य हो तब जाकर के उपजाऊ जमीन को हाथ लगाया जाए। क्रियाएं लम्बी और जटिल होती हैं जो किसानों को अफसरशाही के चुंगल फँसाती हैं।

रक्षा:     क्या देश की सुरक्षा महत्वपूर्ण नही है? देश की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए भी सरकार ने कुछ बदलाव किए। आज देश के लोंगों की गाढी कमाई विदेशों से हथियार मंगाने पर खर्च होती है। क्या हमें इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर नही होना चाहिए? क्या ये देशहित में नही है? अगर सरकार को कोई न्यूक्लियर प्लांट बैठाना होगा तो सरकार इसकी क्या सूचना पहले देशवासियों को देगी? ये सारे सवाल बहुत अनिवार्य हैं । अगर सुरक्षा के क्षेत्र में कोई आवश्कता हो तो वह जमीन किसानों से मांगनी पड़ेगी और मुझे विश्वास है कि वो किसान अपनी खुशी से देगा।

ग्रामीण बिजली  एवं सिंचाई परियोजनाएं: क्या किसानों के खेतों को पानी नही मिलना चाहिए? क्या गांवों में समृद्धि नही आनी चाहिए? नरेंद्र मोदी सरकार ने सिंचाई परियोजनाओं के लिए कानून में बदलाव किए हैं। सरकार सिंचाई के लिए व्यवस्था करना चाहती है। ये बदलाव खेतों को पानी उपलब्ध कराने के लिए हैं। जब तक किसानों को पानी नही मिलेगा तब तक हम उन्हें आत्मनिर्भर नही बना पाएंगे। 2000 एकड में अगर हम एरिगेशन प्रोजेक्ट लगाते हैं तो 3 लाख हेक्टेअर खेतों को हम पानी उपलब्ध करा सकते हैं। यह कहां से किसान विरोधी है?

गरीबों के लिए घर : बड़े पैमाने पर गरीबों के लिए सस्ते घर बनाना।

औद्योगिक कारीडोर : इंडस्ट्रियल कोरीडोर प्राइवेट नहीं, पूंजीपति नहीं, सरकार बनाती हैI इंडस्ट्रियल कोरीडोर प्राइवेट नहीं है, ये सरकार बनाएगी और उस इलाके के लोगों को रोजगार देगी, जो गाँव और किसानो की भलाई के लिए हैl इंडस्ट्रियल कोरीडोर दिल्ली या फिर किसी महानगर में नही बनेगा। यह ग्रामीण इलाको से होकर गुजरेगा। इसके तहत अगर ग्रामीण इलाकों में उद्योग लगते हैं तो इसका सीधा फायदा किसानों को होगा। बेरोजगारों को रोजगार मिलेगा। किसानों के फसलों को उनकी फसलों का सही दाम मिलेगा। जहां कच्चा माल मिलेगा वहां उससे संबंधित उद्योग आने की ज्यादा संभावना है। क्या हमारे ग्रामीण युवाओं को रोजगार देना ठीक नही है?

मुआवज़ा: आपको मालूम है, हिंदुस्तान में 13 कानून ऐसे हैं जिसमें सबसे ज्यादा जमीन संपादित की जाती है, जैसे रेलवे, नेशनल हाईवे, खदान। पर पिछली सरकार के कानून में  भू-अधिग्रहण के लिए संसद द्वारा बनाए गए 13 कानूनों को इस अधिनियम की चौथी अनुसूची में रख दिया गया है। धारा 105 में प्रावधान है कि सरकार एक अधिसूचना जारी कर कानून में मुआवजा या पुनर्वास एवं पुनस्र्थापना संबंधी ‘किसी’ प्रावधान को छूट वाले कानूनों पर लागू कर सकती है, मतलब किसानों को वही मुआवजा मिलेगा जो पिछले कानून से मिलता था। ये ग़लती थी कि नहीं?

बदलाव: NDA सरकार ने इसको ठीक किया और कहा- उसका मुआवजा भी किसान को 4 गुना तक मिलना चाहिए। सुधार किसान विरोधी है क्या?

समय-सीमा: अधिग्रहण के बाद से पांच साल में इस्तेमाल न होने पर संबंधित भूमि को किसान को वापस कर दिया जाएगा।

बदलाव: भूमि लौटाने की सीमा पांच साल से बढ़ाकर परियोजना के बनने में लगने वाले समय तक कर दी गई है। कानूनी रुकावटों के चलते हुई देरी पर यह क्लॉज़ लागू नहीं होगा। सरकार ने प्रोजेक्ट की समय-सीमा बाँध दी है और उतने सालों में अगर प्रोजेक्ट पूरा नहीं होता हैं तो जो किसान चाहेगा वही होगाI प्रोजेक्ट की समय-सीमा बांध कर सरकार ने खुद की  जिम्मेवारी को फिक्स किया हैI

बदलावों को करते हुए सरकार ने मुआवजे और पुनर्वास से कोई समझौता नही किया है। यही नही, जमीन मालिक के आलावा भी उस पर निर्भर लोग मुआवजे के हकदार होंगे। पूरा मुआवजा मिलने के बाद ही जमीन से विस्थापन होगा। इन बदलावों में न्यायसंगत मुआवजे के अधिकार और पारदर्शिता पर खास जोर दिया गया है। अब मुआवजा एक निर्धारित खाते में ही जमा होगा। मुकम्मल पुनर्वास इस कानून का मूल आधार है। बिना उसके कोई भी जमीन किसी भी किसान से देश के किसी भी हिस्से में किसी भी कीमत पर नही ली जा सकेगी। इसके अलावा अब दोषी अफसरों पर अदालत में कार्यवाई हो सकेगी। इसके साथ ही किसानों को अपने जिले में ही शिकायत या अपील का अधिकार होगा।

क्या हम चाहतें हैं कि हमारे किसानों के बच्चे दिल्ली-मुंबई की झुग्गी झोपड़ियों में जिन्दगी बसर करने के लिए मजबूर हो जाएँ? ये व्यावहारिक विषय है। व्यापार के लिए नहीं है, गावं की भलाई के लिए है, किसान की, उसके बच्चों की भलाई के लिए है। आवश्यकता यह है की हमारा किसान ताकतवर कैसे बने, हमारा गाँव ताकतवर कैसे बने? गाँव की और गाँव मे रहने वाले ग्रामीण किसानों और खेतिहर मज़दूरों की सरकार से क्या अपेक्षा रहती है, और अभी तक हमारे पूर्व के सरकारों ने क्या किया है, इस बात को भली-भाँति समझने के लिए, बिहार की पिछड़ी जाती के एक ग्रामीण सांसद श्री हुकुम्देव नारायण यादव का यह भाषण सौ प्रतिशत सटीक है ।

2013 मे समर्थन क्यूँ ?

आप जानते हैं भूमि अधिग्रहण का कानून 120 साल पहले आया थाI देश आज़ाद होने के बाद भी 60-65 साल वही कानून चला। जो लोग आज किसानों के हमदर्द बन कर के आंदोलन चला रहे हैं, उन्होंने भी इसी कानून के तहत देश को चलाया, राज किया। 2013 में आनन- फानन में नया कानून लाया गया, भारतीय जनता पार्टी ने भी इसका समर्थन किया था, किसान का भला हो तो साथ कौन नहीं देगा?

जब नयी NDA सरकार बनी, तब राज्यों की तरफ से बहुत बड़ी आवाज़ उठी। इस कानून को बदलना चाहिए, कानून में कुछ कमियां हैं। एक साल हो गया, कोई राज्य कानून लागू करने को तैयार नहीं। महाराष्ट्र और हरियाणा में कांग्रेस की सरकारों ने लागू किया था। किसान हितैषी का दावा करने वालों ने अध्यादेश में जो मुआवजा देना तय किया था उसे आधा कर दिया। अब ये है किसानों के साथ न्याय? किसान भाइयों-बहनों 2014 में कानून बना है लेकिन राज्यों ने उसका विरोध किया। अब केंद्र सरकार राज्यों की बात सुने या ना सुने? इतना बड़ा देश, राज्यों पर अविश्वास करके चल सकता है क्या? ये पहली सरकार है जो राज्यों के सशक्तिकरण मे लगी है। किसान की भलाई के लिए जो कदम केंद्र सरकार उठा रही है उसके बावजूद भी अगर किसी राज्य को ये नहीं मानना है तो वे स्वतंत्र हैं।  यदि कुछ कमियां रह जाती हैं, तो उसको ठीक करना चाहिए। किसानों का भला हो, गाँव का भी भला हो और इसीलिए कानून में अगर कोई कमियां हैं, तो दूर करनी चाहिए।

अध्यादेश क्यों ?

इस कानून में संशोधन के लिए अध्यादेश का रास्ता चुनने के सरकार के निर्णय की पूर्व मंत्री व कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने जबरदस्त आलोचना की। उन्होंने इस कदम को ‘चिंताजनक’ बताया। किसानों के हित में सरकार का अध्यादेश लाना जरूरी था। यदि सरकार अध्यादेश नही लाती तो किसानों को उनकी जमीन का बाजार भाव से चार गुना मुआवजा नही दे सकती थी। इस प्रावधान के जरिए वर्तमान अध्यादेश यह व्यवस्था करता है कि यदि किसानों की जमीन किसी भी छूट वाले कानूनों के तहत अधिग्रहित की जाती है तो उन्हें अधिक मुआवजा मिलेगा। इन्हीं कारणों से साल के आखिरी दिन अध्यादेश जारी करना भी जरूरी हो गया था अन्यथा सरकार अपनी जिम्मेदारी पूरी करने से चूक जाती। इस अध्यादेश की बदौलत ही सरकार किसानों को उनकी जमीन का चार गुना मुआवजा दे पाई है। केवल राजमार्ग मंत्रालय और उर्जा मंत्रालय ने पिच्छले छह महीने मे किसानों को 2000 करोड का मुआवजा दिया। यह इसलिए हो सका क्योंकि सरकार अध्यादेश लेकर आई।

प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने भी आज किसानों के साथ हुई ‘मन की बात’ में भूमि अधिग्रहण क़ानून पर फैलाए जा रहे भ्रम पर खुल कर विस्तार से बात की है।

यहाँ सुनिए : 

हमारी मीडिया भी इस भ्रम-जाल को फैलाने मे काफ़ी मददगार रही है। कैसे झूठ फैलाए जाते हैं उसका एक छोटा उदाहरण : एनडीटीवी भूमि अधिग्रहण क़ानून 

विपक्षी  दल उनसे बातचीत के बगैर कानून में बदलाव का आरोप लगा रहे हैं। यह भी ठीक नही है। तत्कालीन सरकार ने विज्ञान भवन में सभी राज्यसरकारों के मंत्रियों की बैठक बुलाई थी। जिस बैठक में करीब सभी राज्य सरकारों के प्रतिनिधि मंत्री शामिल हुए। इस विषय में उन राज्य सरकारों के मुख्यमंत्रियों के पत्र भी हैं। सरकार ने जो बदलाव किए उन्ही राज्यों के सरकारों के सुझाव पर किए। यह कानून में संशोधन भारत की खासकर ग्रामीण भारत की विकास संबंधी जरूरतों को संतुलित करता है और ऐसा करते हुए भी यह भूमि स्वामियों के लिए अधिक मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित करता है।यह कानून खेतों, खलिहानों में काम करने वालो और किसानों को समृद्धि बनाने वाला कानून है, गावों में विकास के लिए इस विधेयक का साथ दें।

27 responses to “आइए समझें भूमि अधिग्रहण कानून और इसमे किए गये बदलाव”

  1. मेरी भूमि 1988 मे भूमि अधिग्रहण एक्ट 1948धारा 3 के तहत अधिग्रहण किया गया था जिसका मुआवजा अभी तक नही मिला । क्या मै कोर्ट जा सकता हूँ ।
    पता मुहल्ला – पुरवा
    पोस्ट – मेहदावल
    थाना -मेहदावल
    जिला – सन्त कबीर नगर
    पिन कोड – 272271
    उतर प्रदेश

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    • मेरा आदरणीय बड़े भाई जी मैं आपको बताना चाहता हूं मेरे उत्तर प्रदेश के दिल्ली से सटे गौतम बुद्ध नगर के 39 गांव से होकर ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे निकल रहा है जिस में किसानो को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा नहीं दिया जा रहा है गौतम बुद्ध के वर्तमान डीएम ने अपनी तानाशाही दिखाते हुए अपना कानून किसानों की जमीन छीनने के लिए बना दिया जो भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ है क्या हमारे वर्तमान तानाशाही DM पर भी कोई कार्रवाई हो सकती है मैं आपको बताना चाहता हूं जमीन अधिग्रहण करने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में सर्किल रेट या बाजार भाव का चार गुना मुआवजा दिया जाता है और शहरी क्षेत्र में बाजार भाव या सर्किल रेट का दोगुना दिया जाता है यहां के वर्तमान डीएम ने भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन किया है डीएम ने किसानों के लिए जमीन का अवार्ड करने के लिए गौतम बुद्ध नगर के 39 गांव में एक समान मुआवजा जो कि 35 शुरू पर वर्ग मीटर पर कर दिया है हमारे वर्तमान तानाशाही डीएम ने गौतम बुद्ध नगर के 39 गांव मैं यह जानने की कोशिश नहीं की कि यह गांव शहरी क्षेत्र में है या ग्रामीण क्षेत्र में मैं आपसे जानना चाहता हूं क्या हमारे गौतम बुद्ध नगर के वर्तमान तानासाहीDM पर कोई कार्रवाई हो सकती है

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    • मेरी भूमि नेशनल के पास है, फोर लेन के लिए सड़क से कितने फिट तक भूमि ली जावेगी,एव भवन बनाने के लिए सड़क से कितने फिट बाद अनुमति प्रप्त होगी

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  2. मेरी कृषि जमीन 0.5हेक्टेअर राष्टीय राजमार्ग में अधिग्रहित की गई हैँ।
    नए भू अधिग्रहण कानून से उसका मुआवजा कितना मिलना चाहिए।

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  3. किसानो की जमीन सिंचाई विभाग द्वारा दिसंबर 2014 बैनामा करवा लिया और भुगतान बाज़ार रेट पर दिया जबकि भू-अधिग्रहण अधिनियम 2013 के अनुसार सर्किल रेट का चार गुना करना चाहिए जिलाधिकारी बलरामपुर भुगतान सम्बन्धी किसी प्रकार की इन्कार कर दिया।क्या मै कोटॅ जा सकता हू ।
    शिव कुमार तुलसीपुर बलरामपुर

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    • मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय से निवेदन करता हूं की दिल्ली से सटे गौतम बुद्ध नगर के वर्तमान डीएम ने ईस्टर्न पेरिफेरल से प्रभावित 39 गांवों के किसानों को प्रताड़ित किया है मैं आपको बताना चाहता हूं ईस्टर्न पेरिफेरल से प्रभावित 39 गांवों के किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा नहीं दिया जा रहा है यहां के तानाशाह डीएम न भूमि अधिग्रहण कानून को दरकिनार करते हुए किसानों की जमीन का मुआवजा अपने कानून के तहत कर दिया जो गौतम बुद्ध नगर के किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है मेरी ग्रामीण विकास मंत्रालय से हाथ जोड़कर प्रार्थना है गौतम बुद्ध नगर के वर्तमान डीएम पर शीघ्र कार्रवाई करें और किसानों को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा दिया जाए मैं आपको बताना चाहता हूं भूमि अधिग्रहण कानून में लिखा है कि जब तक किसानो को भूमि अधिग्रहण कानून के तहत मुआवजा नहीं दिया जा सकता तब तक किसान की जमीन पर कब्जा नहीं ले सकते लेकिन यहां के वर्तमान डीएम ने अपनी तानाशाही दिखाते हुए किसानों की जमीन का मुआवजा क्या कर दिया जो भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ है वहां का जिला प्रशासन किसानों की जमीन पर जबरदस्ती फोर्स लगाकर कब्जा लेना चाहता है जो भूमि अधिग्रहण कानून के खिलाफ है हमारे गौतम बुद्ध नगर के 39 गांवों के किसान जब जमीन पर जबरदस्ती कब्जा करने आए जिले के प्रशासन पुलिस प्रशासन का विरोध करते हैं तो मेरे गौतम बुद्ध नगर के किसानों पर फर्जी मुकदमे दायर करके जेल भेज दिया जाता है और मेरी किसान माताओं को भूसे की तरह गाड़ियों में भरकर यहां का प्रशासन पुलिस प्रशासन पुलिस लाइन ले जाकर मेरी माता किसानों को यहां के जिला प्रशासन द्वारा प्रताड़ित किया जाता है मेरी ग्रामीण विकास मंत्रालय से हाथ जोड़कर प्रार्थना है किसानों को उनका हक़ दिया जाए और ऐसे तानाशाह ATM पर सीधी कार्रवाई की जाए जय जवान जय किसान

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  4. मेरी कृषि जमीन 0.0630हेक्टेअर राष्टीय राजमार्ग में अधिग्रहित की गई हैँ।
    नए भू अधिग्रहण कानून से उसका मुआवजा कितना मिलना चाहिए। DLC Rate 1793000

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    • मेरे आदरणीय बड़े भाई यदि आपका गांव ग्रामीण क्षेत्र में आता है तो उसका मुआवजा सर्किल रेट या बाजार भाव में जो अधिक हो उसका 4 गुना और यदि आपका गांव शहरी क्षेत्र में आता है तो सर्किल रेट या बाजार भाव का दोगुना मिलेगा अब देखना आप को है कि आपका गांव शहरी है या या ग्रामीण यदि आपके गांव में ग्राम पंचायत है तो फिर आपको ज्यादा दिमाग लगाने की जरुरत नहीं है फिर सीधे-सीधे आप ग्रामीण क्षेत्र में आते हो तो अपनी तहसील में जाकर अपने गांव का सर्किल रेट देखो और जो सर्किल रेट हो उसमें चार गुना करके जो रेट बैठता है वह आप का 4 गुना होगा और जो चार गुना निकलकर आता है उसको अपने वर्ग मीटर जो आपने लिखा है उसे बनाकर दो आपका पैसा निकाल आएगा

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  5. मेरी जमीन NH-२३३ में चला गया है जिसका रेट सर्किल रेट बहुत कम दिया गया है इस के लिए मैं क्या करू ?
    नाम-भीम चन्द कसौधन
    पता-सिविल लाइन तेतरी बाज़ार सिद्धार्थनगर (U.P)
    पिन कोड-२७२२०७

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  6. Meri jamin ka adhigrhad 2015-16 me kiya gya hay may bhumhin ho gya hnu mjhe punarawas ke liye Khi bhi bhumi nahi hay mujhe punar awas ke liye bhumi diya jaye

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  7. मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय को बताना चाहता हूं जब किसानो को अपने साथ हो रही समस्या के लिए DM के पास जाना पड़ता है तो किसानों की समस्या दूर हो जाती है लेकिन मेरे गोतम बुद्ध नगर के 39 गांव के ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे से प्रभावित किसानों की समस्या खुद गौतम बुद्ध नगर के तानाशाह डीएम ने कर रही है तो ऐसे में हमारे किसानों की जिले स्तर पर सुनवाई कैसे हो सकती है मैं ग्रामीण विकास मंत्रालय से अपने गौतम बुद्ध नगर के ईस्टर्न पेरिफेरल हाईवे से प्रभावित किसानों की समस्याओं को शीघ्र समाधान करने के लिए प्रार्थना करता हूं और भविष्य में कोई DM अपने जिले के किसानो के साथ भूमि अधिग्रहण कानून का उल्लंघन ना करें इसलिए अपने गौतम बुद्ध नगर के वर्तमा तनसाह DM पर शीघ्र कार्रवाई के लिए प्रार्थना करता हूं
    😢एक छोटे से किसान का छोटा किसान बेटा सत्येंद्र नागर शहाजी जिला गौतम बुद्ध नगर😢

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  8. Mara bhumi nh84 ara Bihar ma muja court sa vi awseay ho Chuka ha Lakin avi tak bhumi ka passa nahi mila to kay kar.

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    • यूपीएसआइडीसी ने मीरपुर हिन्दू गाजियाबाद यूपी में सन् 2006-7 मे धारा 4लगाई2009मे फर्जी समझोता जिसपर प्रधान या परसासनिक अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं उके आधार पर 1100/मीटर की दर से आज 15/2/2019 तक 28%जमीन का भुगतान हो सका । इसके विरोध में 2010मे ही किसान हाईकोर्ट कोट चलें गये थे। जमीन पर आज तक किसानों का कब्जा हैं।
      जिन28%ने मुवावजा उठा लिया उन्हें 2013 अधिनियम का लाभ कैसे मिले?

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  9. तुलसी राम गांव टकोली जिला मण्डी हि प्र। says:

    मेरी भूमि नेरचौक मनाली फॉर लैन के लिए अधिगृहित की गई है।
    क्या मेरे परिवार के सदस्य को इसमें रोजगार मिलेगा?
    मुआवजा भी दो गुना ही दिया जा रहा है।
    क्या मैं कोर्ट जा सकता हूँ?

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    • नया भूमि अधिग्रहण नियम नये क़ानून में 4 गुना मुआवज़ा का प्रावधान और एक सदस्य को नौकरी का प्रावधान था जो की कांग्रेस के सौजन्य से पास नहीं हुआ है इसलिए मुआवज़ा दो गुना ही मिलेगा. कोर्ट जाने की सलाह मैं नहीं दूँगा.

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      • मेरी जमीन बांध बनाने को 1972 में बिहार के मनेर पटना में अधिग्रहीत की गई थी बांध के अलावा जो खाली ज़मीन बची है क्या मै उसे खेती के लिए उपयोग में ला सकता हूं

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  10. me gujrat se cottan jining fektari sala raha tha lekin bhavnagar somnath forlen haeve nikal ne che meri fektari ka 1800 mitar jaga smpad ho ne ki bajase Aaj mera parivar or dusre 35 majdur ki roji roti chali gay he or jo ham logoko muvabja mila o bhi bahut kam mila he Aaj mere parivar ke upar 4 cr benk ka or dusra 2cr milake 6cr karj me dubgaya hu to Aage me kya karu Aap pllij batavo or ho chake to Aap ka nambar do

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  11. हमारी ज़मीन 1997 खनन के लिए सम्पादित की गयी थी। 2018 तक हम किसानों का कब्ज़ा है। तो क्या 2013 के भूमि अधिग्रहण बिल के तहत हमें यह ज़मींन वापस मिल सकती है या नहीं। अगर हां तो इसके लिए हमें क्या करना चाहिये।

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  12. मेरी भूमि सड़क से 200मीटर अंदर है इसका किस हिसाब से मुआवजा मिलना चाहिये । सड़क डामर सहित है

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  13. मेरी जमीन साल 2004 में ही है अधिग्रहण कर लिया मुआवजा उसी के अनुसार मिला था पुरानी कानून की आज हमारे यहां का सर्किल रेट ₹700000 क्या मुझे नया रेट मिल सकता है कोर्ट जाने पर जबकि अब जो उसी में जमीन दे रहे हैं उन्हें नया सर्किल रेट मिल जाए

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  14. यूपीएसआइडीसी ने मीरपुर हिन्दू गाजियाबाद यूपी में सन् 2006-7 मे धारा 4लगाई2009मे फर्जी समझोता जिसपर प्रधान या परसासनिक अधिकारी के हस्ताक्षर नहीं उके आधार पर 1100/मीटर की दर से आज 15/2/2019 तक 28%जमीन का भुगतान हो सका । इसके विरोध में 2010मे ही किसान हाईकोर्ट कोट चलें गये थे। जमीन पर आज तक किसानों का कब्जा हैं।
    जिन28%ने मुवावजा उठा लिया उन्हें 2013 अधिनियम का लाभ कैसे मिले?

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  15. Government ne mere saath dhokh Kiya mery Jamin me govt.school Bana diya badle me vivadit Jamin di us Ko logo ne apni Jamin btaakr mere se hdp li gyi muje kuch nhi Mila me calector & sdm Ko btaya Lekin kisi ne meri sunvay nhi ki ab me tng aakar Court Jane ki sohe rha hu ki
    Ya to Rojgar uplbdh kraye .ya Jamin de
    V& post guda Shyama
    Th. Sojat
    District Pali ,Rajasthan. 306103

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  16. मेरी भूमि ऐन येल 75 त हसीन छतरपुर मध़यपृदेश मे गयी है जिसमें धारा 24एवं25का उपयोग नही किया गया जिससे 2010-11के रेट से 2017मे अवार्ड पारित किया गया है जो कि गैरकानूनी है या नही सुझाव देने की कृपा करे तो आपकी कता क पा होगी

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  17. मेरे गाँव मै मध्यम श्रेणी सिचाई परियोजना बनाई जा रही है मेरी जमीन का सर्किल रेट बर्ष 2012-13मे 6 लाख रूपये पृति हेक्टेयर था ।लेकिन जैसे ही नया भूमि अधिगृहण अधिनियम 1013 बना जिसमै किसानो को सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा देने का नियम है तो उ.पृ.सरकार ने हमारा सर्किल रेट 6 लाख से घटा कर 3लाख90हजार पृति हे.कर दिया इस स्थिति मै हम किसान क्या करे महोदय उचित सलाह देने की कृपा करे।

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